“जो मैनें बीज बोए….”, उपकप्तान बनते ही सूर्यकुमार यादव के बदले तेवर, दे डाला विवादित बयान!

“जो मैनें बीज बोए….”, उपकप्तान बनते ही सूर्यकुमार यादव के बदले तेवर, दे डाला विवादित बयान!

Suryakumar Yadav: भारत और श्रीलंका के बीच 3 मैचों की रोमांचक T20I सीरीज़ का पहला मुकाबला 3 जनवरी को खेला जाएगा. जिसके लिए बीसीसीआई ने 16 सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा भी कर दी है. जिसमें स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या टीम का नेतृत्व करते हुए नज़र आएंगे. जबकि सूर्यकुमार यादव को उप कप्तान की भूमिका सौंपी गई है. सूर्या (Suryakumar Yadav) पहली बार यह ज़िम्मेदारी संभालते हुए दिखाई देंगे. लेकिन, इस भूमिका को निभाने से पहले उनके तेवर कुछ बदले बदले से नजर आ रहे हैं. इसका अंदाजा आप उनके हालिया बयान से लगा सकते हैं.

Suryakumar Yadav ने उपकप्तान बनने के बाद दिया ऐसा बयान: भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक मध्य क्रम के बल्लेबाज़ सूर्यकुमार यादव को सीनियर खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में उपकप्तान बनाया गया है. इस खास जिम्मेदारी के मिलने के बाद उनका कहना है कि इस बात की उन्हें उम्मीद तक नहीं थी. सूर्या (Suryakumar Yadav) ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि,

“इसकी (उप कप्तान) मुझे कोई उम्मीद नहीं थी. लेकिन जिस तरह से पिछला साल गुजरा है तो मैं समझता हूं कि यह मेरे लिए ईनाम है. मुझे यह पाकर अच्छा लग रहा है.”

पिता ने दी उपकप्तान बनने की सूचना: सूर्यकुमार यादव ने आगे अपने बयान में इस बात का भी ज़िक्र किया कि उनके पिता ने उन्हें इस बात की सूचना दी थी और कहा था कि ज़्यादा दबाव मत लेना और अपनी बल्लेबाज़ी का आनंद लेना. पिता के साथ हुई बातचीत के बारे में खुलासा करते हुए उन्होंने कहा,

“मेरे पिता ने मुझे स्क्वाड लिस्ट भेजी क्योंकि वह हमेशा सोशल मीडिया पर रहते हैं. इसके बाद हमने एक-दूसरे से बातचीत की. उन्होंने मुझे एक और छोटा सा मैसेज भेजा. उन्होंने लिखा कि ज्यादा दबाव मत लेना और अपनी बल्लेबाजी को एंजॉय करना.”

“यह मेरी सालों की मेहनत का फल है”: 32 वर्षीय सूर्यकुमार यादव ने आगे यह भी कहा कि यह उनकी सालों की मेहनत का ही फल है. यह उनके लिए एक सपने की तरह है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से चीज़ें उनकी ज़िंदगी में हो रही हैं, उससे वह काफी ज़्यादा खुश हैं. सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने कहा कि,

“मैंने अपनी आंखें बंद की और खुद से पूछा कि क्या यही टीम है? यह मेरे लिए एक सपने की तरह था. यह मेरी सालों की मेहनत का फल है. जो बीज मैंने बोए, वह पेड़ आखिरकार बड़ा हो गया है और मैं इसके फलों का अब आनंद ले रहा हूं. जिस तरह से चीजें हो रही हैं, उससे मैं बेहद खुश हूं.”

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